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ज्योतिष शास्त्र में राहु को अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है. राहु की कुछ खास स्थिति शुभ परिणाम दे सकती है और कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जो जातक को गंभीर परिणाम भुगतने का कारक बनती हैं. किसी व्यक्ति की कुंडली में अगर राहु तीसरे या छठे भाव में हो तो शुभ परिणाम जातकों को प्राप्त होते हैं.
जातक सही फैसले राहु के प्रभाव से ही लेते हैं. काम में सफलता मिलने और साहस बढ़ाने का कारक राहु ही है. आर्थिक रूप से मजबूती का कारक भी राहु है. राहु एकादश भाव में हो तो अपने प्रभाव से शुभ परिणाम देता है. जातक को धन, यश, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
ज्योतिष की मानें तो राहु की महादशा 18 साल की होती है और इस दौरान जातकों को कई कष्ट झेलने पड़ जाते हैं लेकिन राहु की प्रिय राशियों को महादशा में भी कम से कम दिक्कतें होती है. यानी राहु की दो प्रिय राशियां है सिंह और वृश्चिक जिन पर हमेशा ही राहु की कृपा बनी रहती है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पापाी ग्रह राहु की प्रिय राशि सिंह राशि है. राहु जब भी सिंह राशि में गोचर करता है तो इन जातकों को शुभ फल देता है. सिंह राशि के जातकों को अचानक धन की प्राप्ति होती है. इस दौरान जातकों के जीवन में कई बड़े व सकारात्मक बदलाव होते हैं. राहु की शुभ दृष्टि से जातकों को सुख व सुविधाओं की प्राप्ति होती है. हर ओर से अच्छे परिणाम मिलते हैं. मानसिक तनाव खत्म होता है.
वृश्चिक राशि के जातकों पर राहु की विशेष कृपा होती है. वृश्चिक राहु की प्रिय राशियों में से एक है. इस राशि के जातकों को करियर में सफलता दिलाने में राहु मुख्य भूमिका में होता है. व्यापार में जातक अच्छा प्रदर्शन करते हैं और आर्थिक स्थिति भी राहु के प्रभाव से अच्छी रहती है. वृश्चिक राशि के जातक सामाजिक मान-प्रतिष्ठा राहु के प्रभाव से हासिल करते हैं.

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